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अलौकिक दिव्य स्वप्न का एहसास करा जाती हैं, सोहल हरिंदर सिंह की कलाकृतियां !”: सिद्धेश्वर

 

  • पटना :04/10/2021 ! ” सोहल हरिंदर सिंह की कलाकृतियां पारंपरिक सौंदर्य बोध का एहसास करा जाती हैं ! उनकी कलाकृतियों में मानव आकृतियों को जो आकार मिला है, वह अद्भुत है ! चाहे वह बांसुरी बजाता हुआ पहाड़ीवासी हो या देश के महापुरुष लाल बहादुर शास्त्री, उनके द्वारा चित्रित प्रकृति का सौंदर्य अपनी अनुपम छटा बिखेरते अलौकिक दिव्य स्वप्न का एहसास करा जाता है l  ऐसी कलाकृतियां न सिर्फ हमारे बेडरूम की शोभा बनती हैं, बल्कि हमारी आंखों में रोशनी भर देती हैं जिसके कारण चित्रों में निर्मित सांसारिक रंग, हमारे जीवन के इंद्रधनुषी रंग से तालमेल करने में सफलता अर्जित कर लेते हैं l”

भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के तत्वावधान में आयोजित फेसबुक के “अवसर साहित्यधर्मी पत्रिका” के पेज पर “हेलो फेसबुक संगीत एवं  चित्रकला सम्मेलन” का संचालन करते हुए उपरोक्त उद्गार  संस्था के अध्यक्ष सिद्धेश्वर ने व्यक्त किया !

इस ऑनलाइन चित्रकला प्रदर्शनी में  सोहल हरिंदर सिंह की पचास से अधिक कलाकृतियों का प्रदर्शन किया गया ! मुख्य वक्ता डॉ. बी. एल. प्रवीण ( डुमरावं ) ने कहा कि सोहल हरिंदर सिंह वरिष्ठ चित्रकार की चित्रावली मूलतः रेखांकन की बजाय भित्तिचित्र से संदर्भित हैं। रेखांकन और भित्तिचित्र में एक विशेष अंतर यह है कि रेखाचित्र में त्रुटियां ढूंढ़ना अथवा कमियां निकालना दुर्लभ होता है। किंतु भित्तिचित्र में ऐसा नहीं है। इसमें सहज और असहज का अंतर्मूल्यांकन चलता रहता है।

राज प्रिया रानी ने कहा – ” कलाकर्म सद्भावना से प्रेरित और सांप्रदायिकता के खिलाफ होता है। इनकी सभी कलाकृति वास्तविक चित्र दर्शाने में सौ फ़ीसदी कामयाब है। कहने को तो इन्होंने अपना विषय वस्तु बहुत ही सामान्य वस्तुओं पर आधारित रखा है और साधारण महिला पर केंद्रित है, किन्तु वास्तविकता यह है कि इनमें वाकई यह अद्भुत गुण है कि साधारण कला को आकर्षक रूप से निखारने में और प्रदर्शित करने में पूर्णतः सक्षम हैं।” जबकि ऋचा वर्मा के अनुसार – “विलक्षण व्यक्तित्व के धनी  सोहल हरिंदर सिंह मोहाली जी की कला उत्कृष्ट शैली की अनुपम कृति है l आंतरिक भावनाओं और मानवीय दृश्यों  को प्रदर्शित करती हरिंदर जी की कलाकृतियां हमारे जीवन के विभिन्न पक्षों को सामने रखती हैंl ”

 

हेलो फेसबुक संगीत सम्मेलन की शुरुआत  लोकप्रिय गीतकार सत्येंद्र संगीत के लोकगीत- “हरे रामा, घेरी घेरी नभ में बदरा छाई कारी रे रामा” से हुई l  इसके बाद अनुभव, जो दिव्यांग हैं तथा सेरिब्रल पाल्सी से ग्रसित हैं। उन्हें संगीत में विशेष रूचि है तथा घूमने और कविताएँ लिखने का बहुत शौक़ है। उनके द्वारा गाया गया एक गीत भी प्रस्तुत किया गया, जिनका साथ दी आस्था दीपाली ने- ये मौसम,  ये रातें,  ये नदी का किनारा, ये चंचल हवा !” और मधुरेश नारायण ने “जिंदगी ख्वाब है, ख्वाब में,  सच है क्या,  झूठ है क्या ? गीतों को अपने मधुर कंठ से सुना कर मनमुग्ध कर दिया l  इसके अतिरिक्त दीपाली आस्था ने मनमोहक नृत्य भी प्रस्तुत किया l सीमा रानी ने  “चांद मारे ला किरणवा के वाण, !”  भोजपुरी गीत को बहुत अच्छे ढंग से प्रस्तुत की !

कार्यक्रम में गजानन पांडे,संतोष मालवीय, सोहेल फारुकी, दुर्गेश मोहन, डॉ सुनील कुमार उपाध्याय,  कुमारी मेनका, अपूर्व कुमार, गोरख प्रसाद मस्ताना, एकलव्य केसरवानी,  विमलेश कुमार, आराधना प्रसाद , मंजू कुमारी, बीना गुप्ता, घनश्याम प्रेमी, पूनम कतरियार, आदि की भी भागीदारी रही!

  • प्रस्तुति : ऋचा वर्मा ( सचिव) सिद्धेश्वर, ; [ अध्यक्ष ] भारतीय युवा साहित्यकार परिषद { मोबाइल:  : 92347 60365
  • कलाकृतियाँ – सोहल हरिंदर सिंह

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