Spread the love

 

◆पेन्टर मदन

 

कुण्डलिया छन्द

【१】

उपवन महका आपके, सुनते ही पदचाप ।

कलियाँ तो करने लगीं, तेरा मन में जाप ।।

तेरा मन में जाप, लगन उपजी चाहत  में ।

पाकर यह सौगात, खुशी आई राहत में ।।

कहे मदन क्या बात, सजाया है मन-आँगन ।

चहक उठी है आस,हँसा जीवन का उपवन ।।

 

【२】

बीते सुखमय लोहड़ी,रहें सभी खुशहाल ।

श्रम को निश्चित ही मिले,सुख से रोटी-दाल ।।

सुख से रोटी-दाल, बनाओ भाईचारा ।

तब उन्नति की राह,बढ़े यह देश हमारा ।।

कहे मदन जय हिन्द, नहीं अब मन हों रीते ।

मिले भाव से चाव, सभी सुख-पावन  बीते ।।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.