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– अरुण निशंक

 

शेर’

गा लो इन गजलों को तन्हा दिल बहल जाये

तुम मुस्कुरा दो सारी उदासी ढल जाये

न रखों झुका के शरबती आँखें अपनी

तीर नजरों के चल जाये तो चल जाये ।

 

 

प्रिये ये तेरे होंठ रसीले नैन नशीले

देख के तुझको किसका न दिल मचल जाये

अब तो प्रीत निभाओ मेरी बांहों में आओ

हमारी वफा से जो जलता है सो जल जाये ।

 

 

है मेरे दिल की बस इतनी सी हसरत

जग के कोने कोने में प्रेम कंवल ही खिल जाये

किसी को किसी से न रहे गिला शिकवा

सबके लबों पर फक्त मेरी नज्म आये ।

 

 

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