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  • नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’

शीर्षक पढ़ कर आप को कुछ अटपटा लग रहा होगा, लेकिन यह सत्य है कि हम अपने मोबाइल – लेपटॉप को भी कुछ घंटे के लिए आराम करने दें . हम इंसान लगातार 24 घंटे काम नहीं कर सकते . हमें 8 – 10 घंटे का ब्रेक चाहिए यानी नींद चाहिए . तभी हम फिर से उठ कर दिन भर के काम में लगे रहते हैं . घर – ऑफिस,  बाहर – भीतर करते हर कोई थक जाता है और रात 10 या 11 बजे बिस्तर पर चला जाता है सोने के लिए . हर इंसान और यहाँ तक कि जानवर को भी आराम चाहिए, लेकिन क्या आज के युग में इन डिजिटल गैजेट्स को कोई आराम नहीं चाहिए ?  जरा सोंचे !

दिन भर कोई बच्चा घर में टी. वी. देखता है, तो मम्मी – पापा डांटने लगते हैं कि आँखें खराब हो जाएंगी ज्यादा टी. वी. मत देखो . सिर्फ 1 या 2 कार्टून देख टी. वी. बंद कर दो . यह बात हर बच्चे पर माता – पिता ने लागू किया है, लेकिन आज खुद माता – पिता ही अपने मोबाइल से 18 – 20 घंटे चिपके रहते हैं उन्हें कौन समझाए ?

वे देर रात तक व्हाट्सएप और मैसेंजर पर मैसेज फार्वड करते रहते हैं . सुबह में उठते के साथ अपने सभी अनजाने दोस्तों को गुड मार्निंग का स्टिकर भेजने के बाद ही बाथरूम में घुसते हैं .

पहले लोग सुबह में उठते के साथ बाथरूम से फारिग हो पार्क या बगीचा में टहलने जाते थे, दूध, सब्जी या अखबार लेने जाते थे . अड़ोस – पड़ोस वालों से दुआ सलाम करते थे, लेकिन जब से स्मार्ट फोन सबके हाथों में आया है ज्यादातर लोग समाजिकता छोड़ चुके हैं या यूँ कहिए अपनों से कट से गए हैं और अनजानों से जुड़ गए हैं .

भले हम अपने घर के किसी सदस्य को सुबह में गुड मॉर्निंग या रात को गुड नाइट नहीं कहते, लेकिन आभासी दुनिया के सभी अनजाने मित्रों को सुबह – शाम गुड मॉर्निंग, गुड नाइट, नमस्ते और हैप्पी संडे आदि का स्टिकर याद से भेजते हैं . जब तक न भेजे लगता है कि दिल को चैन ही नहीं मिला . या हम किसी ऐसे मुगालते में रहते हैं कि जब तक हम गुड मॉर्निंग – गुड नाइट किसी को नहीं भेजेंगे तो उनकी न सुबह होगी या ना रात . शायद वह हमारे मैसेज के भरोसे ही दिन – रात का अनुमान लगाते हों . एक कहावत है मुर्गा अगर बाग़ न दें तो क्या सुबह नहीं होगी ?

नियम से इन मैसेज को भेजने में हम अपना कितना समय बर्बाद करते हैं इसका तो अंदाजा लगाना भी मुश्किल है या हम जानबूझ कर समय का हिसाब रखना नहीं चाहते .

आप कैसे / कैसी हैं ? आपने नाश्ता किया ? आप क्या कर रहे / रही हैं ? आप बहुत सुंदर / स्मार्ट  दिख रही / रहे हैं . वैगरह  – वैगरह . मैसेंजर के अंदर घुस कर चैटिंग से हम सोशल मीडिया के दोस्तों से ऐसे – ऐसे बेतुके सवाल पूछते हैं कि सामने वाले बंदा / बंदी हमें ब्लॉक ही कर देते हैं . क्या ऐसे सवाल पूछना जायज है ? उनकी निजी जिंदगी में चैटिंग से ताक – झाँक करना क्या हमें शोभा देती है ?  इसका जवाब आप खुद दें .

 सुबह से लेकर रात तक फेसबुक, व्हाट्स एप, मैसेंजर, मेल, यू ट्यूब गूगल, ट्यूटर और इंस्ट्रग्राम आदि पर हर कोई अपनी आँखें सेंकता रहता है .

खाते – पीते, चलते – फिरते, लिखते – पढ़ते, खाना बनाते यहाँ तक कि बाथरूम में भी लोग मोबाइल चलाने से बाज नहीं आते .  मोबाइल पर टीप – टाप करते ही रहते हैं . दिन भर मोबाइल – लेपटॉप पर वीडियो गेम, फिल्म देखते रहो, कान में इयर फोन लगा बस यू ट्यूब पर बिना सिर – पैर वाली नई – नई खबर, गाने सुनते – देखते रहो  . इसके साथ कुछ अश्लील भी देख लिया जाए आटे में पड़े चुटकी भर नमक की तरह क्या फर्क पड़ता है . यह दशा आज हर किसी की है . इससे आज कोई भी अछूता नहीं है .

झुनी सोशल साइट्स पर इस कदर बीजी रहती है कि उसके हाथों से मोबाइल कभी छूटता ही नहीं . और इसका खामियाजा उसे एक दिन ज्यादा भुगतना पड़ा . जब मेहमान के आने पर वह खाना बनाने के साथ मोबाइल भी चला रही थी और सब्जी में नमक की जगह चीनी डाल दी . वैसे पहले भी वह मोबाइल के कारण खाना जला देती थी, लेकिन इस बार उसने हद ही कर दी . सारी सब्जी उसे दुखी मन से फेंकनी पड़ी . ससुराल के लोगों का कोपभाजन बनना पड़ा और मेहमान के सामने शर्मिंदा भी हुई .   

स्मार्ट मोबाइल से आज सारे काम हो रहे हैं . मोबाइल से फायदा भी है और नुकसान भी . इस समय आँख – कान के डाक्टरों के पास लंबी लाइन लग रही है . ऐसे मरीज उनके पास ज्यादा जा रहे हैं जिनकी आँखों से पानी गिर रहा है . कम दिखाई दे रही है . धूप में जाने से आँखें चमकती हैं . अक्षर पहचान नहीं पाते .

स्मार्ट फोन से निकलने वाली किरणें आँखों को ज्यादा क्षति पहुंचाती है .

फुल व्यलूम ( तेज आवाज ) में लोग इयर फोन कान में लगा गाने सुनते हैं, जिससे कान के पर्दे पर ज्यादा दबाव पड़ता है और सुनने की शक्ति क्षीण हो जाती है .

  वैज्ञानिक शोध निष्कर्षों में ऐसा पाया गया है कि मोबाइल फोन और इसके टावर से निकलने वाली रेडिएशन व्यक्ति की पाचन शक्ति को कमजोर कर सकती है और उसके कारण ठीक से नींद ना आने की बीमारी और एकाग्रता की कमी हो सकती है . अक्सर लोग सोते समय मोबाइल को अपने तकिए के नीचे वाइब्रेटर या साइलेंट मोड पर करके सो जाते हैं, लेकिन मोबाइल को इस तरह रखने का तरीका स्वास्थ्य को अधिक नुकसान पहुँचा सकता है . यूनिवर्सिटी ऑफ केलिफोर्निया के एक शोध के अनुसार मोबाइल को वाइब्रेशन मोड़ पर ज्यादा देर तक इस्तेमाल करने से कैंसर का खतरा अधिक होता है . इसका कारण यह है कि मोबाइल के सिग्नल के लिए जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें आती हैं, वे दिमाग की कोशिकाओं की वृद्धि को प्रभावित करती है और इससे ट्यूमर विकसित होने की संभावना अधिक होती है . कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शलभा गुप्ता के अनुसार – मोबाइल टावर से मोबाइल फोन को जोड़ने के लिए जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें निकलती हैं वे मस्तिष्क की कोशिकाओं के विकास को प्रभावित करती है . चूँकि मस्तिष्क के भीतर भी सूचनाओं का आदान-प्रदान इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों के माध्यम से होता है, अत: मोबाइल को तकिए के पास रखने से दिमाग की प्रकृतिक तरंगें प्रभावित होती हैं . इसके कारण शरीर में कैंसर सहित कर्इ तरह की परेशानियाँ बढ़ने का खतरा है . मस्तिष्क की प्रकृतिक तरंगों में बाधा पहुँचाने के कारण इसकी कोशिकाओं का स्वाभिक विकास रूक जाता है और वे पूर्ण  विकसित होने से पहले ही विभाजित होने लगती है एवं ट्यूमर  बना लेती है .

मोबाइल फोन, लैंड लाइन  या फिर पब्लिक फोन आदि सूचना क्रांति की महत्वपूर्ण सौगात हैं और इसकी किसी न किसी रूप में आवश्यकता पड़ती ही रहती है . लेकिन इसके माध्यम से कर्इ तरह के छूत के रोग फैलते हैं . सर्वेक्षण अध्ययन यह बताता है कि फोन पर पाए जाने वाले रोगाणुओं आम बीमारियों जैसे- सरदी, जुकाम, खाँसी आदि के रोगाणु काफी  अधिक संख्या में मौजूद रहते हैं और इनकी सबसे अधिक संख्या माउथपीस में मौजूद होते हैं . यह बात पूरी तरह से स्पष्ट है कि वर्तमान परिस्थितियों में संचार क्रांति की इस महत्त्वपूर्ण तकनीकी प्रगति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और इसका प्रयोग करने से भी स्वयं को रोकना ठीक नहीं है, लेकिन कुछ सावधानियों पर यदि ध्यान दिया जाए तो बहुत सी बीमारियों से छुटकारा पाई जा सकती है .

मोबाइल – लेपटॉप पर काम करते वक्त अपनी पलकें बार – बार झपकाते रहें . जरूरी काम निपटा या देख कर कुछ घंटे इन गैजेट्स को बंद कर दें . अपनी भाषा में कहे तो उन्हें भी आराम करने का मौका दें . गैजेट्स से दूर हटते ही आप आँखों को ठंडे पानी से छींटे मारे ताकि आँखों की नमी बनी रहे . कभी – कभी ज्यादा मोबाइल चलाने से वह बहुत गर्म हो जाता है . इतना गर्म कि लगता है मोबाइल ब्लास्ट कर जाएगा . इस स्थिति में मोबाइल को ऑफ़ कर दें . ताकि कोई हादसा न हो .  समय रहते आप चेत जाए . 1 – 2 घंटे नेट बंद कर अपने स्मार्ट मोबाइल को भी आराम करने दीजिए . साथ में आप भी रिलैक्स हो जाए . उस समय आप किताब पढ़ें, बागवानी करें, बच्चों के साथ खेलें या घर का बिखरा हुआ काम करें .

 मोबाइल को सुला कर खुद प्रकृति की गोद में कुछ पल बिताएं ताकि आपकी आँखों को सुकून मिले, आराम मिले !

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