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– नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’

 

महान लेखक प्रेमचंद ने बिल्कुल सच कहा है, ‘पुस्तक से बढ़कर कोई सच्चा मित्र नहीं !’

पुस्तक मतलब किताब, बुक . किताब एक ऐसी चीज है जो भटके हुए लोगों को सही राह दिखाती है . किताब के बिना पूरा प्राणी जगत अधूरा है, सभी का ज्ञान अधूरा है . एक अच्छी किताब ही हमें बताती है कि हमें अपने लक्ष्य प्राप्त करने के लिए हमें कौन – कौन सी बातों पर ध्यान देना चाहिए ? बड़े – बुजुर्गों या जरूरत मंदों की किस तरह सेवा और मदद करनी चाहिए ? जिंदगी को कैसे जीना चाहिए ? सभी धर्मों के साथ हमें कैसे रहना चाहिए ? आदि .

अच्छा खाना खाने से हमारा केवल शारीरिक विकास होता है, मगर एक अच्छी किताब या पत्रिका पढ़ने से हमारा मानसिक, बौद्धिक  और व्यक्तित्व का विकास होता है . हमारे चरित्र का निर्माण होता है .  हमें हर चीज को देखने समझने के लिए एक ऐसी नजर और दिमाग मिलते हैं, जिससे हम अच्छे – बुरे की पहचान कर सकते हैं .

इसलिए तो रविन्द्र नाथ ठाकुर ने कहा है, ‘आँखों के सामने जो वस्तु पड़ी है उसे जानने के लिए भी हमें पुस्तकों का मुंह देखना पड़ता है .’

रामायण, महाभारत, श्रीमद भगवदगीता, रामचरित्र मानस, इंजील, गुरुग्रंथ साहिब, कुरान शरीफ और बाइबिल आदि ऐसे ग्रंथ हैं, जो हर संकट में हमारा मार्ग दर्शन करते हैं .

 अफ्रीका के अश्वेत नेता डॉ. नेल्सन मंडेला ने अपने 27 साल के कारावास जीवन को किताबों के सहारे ही बिताया था .

किताब बहुत अनमोल होती है . जरूरत है उसे संभल कर रखने की ताकि वक्त जरूरत वह हमरी मदद कर सके .

किसी को किताब पढ़ने की ऐसी आदत होती है कि अगर वह एक दिन भी किताब न पढ़े तो वह बेचैन हो जाता है या बिना पढ़े नींद नहीं आती .

लखनऊ की उमराव जान अदा एक प्रख्यात तवायफ थीं . वह ‘क़ुतुबबीनी’ मतलब किताब पढ़ने की बेहद शौकीन थीं . उनका  कहना था, ‘अगर मुझे किताबें पढ़ने का शौक न होता तो, अब तक मैं ज़िंदा नहीं रहती .’

बस या ट्रेन में सफर कर रहे लोग तो अपने साथ बैठे सहयात्रियों से अच्छी किताबें, पत्रिकाएँ और अख़बार मांग कर पढने में जरा भी संकोच नहीं करते .

इंसानों की दोस्ती से अच्छी होती है किताबों की दोस्ती . इंसान तो वक्त जरूरत हमें धोखा भी दे देता है, मगर एक अच्छी किताब एक सच्चे दोस्त की तरह जीवन भर हमारा साथ निभाती है . जिंदगी से दुखी हो तो अच्छी बात सिखलाती है और टेंशन में हो तो कथा, कहानी, कविता और चुटकुले आदि से हमारा मनोरंजन करती है और होंठों पर खूब सारी हंसी लाती है .

यहाँ हमें यह भी ध्यान रखना है कि कोई गलत या गंदी किताब पढ़ने से हमें खुद को रोकना भी है, क्योंकि एक गलत किताब पढ़ने से हमारे पूरे वजूद पर उसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है . इसलिए देखभाल कर सोच समझ कर अच्छी पत्रिकाएँ, अच्छी – मोटिवेशनल किताबें और महापुरुष आदि की ही किताबें पढ़नी चाहिए .

आलमारी में सजी हुई अच्छी किताबें एक बगीचे के सामान होती है, जिसमें हर रंग के फूल की तरह अनेकों किताबें अपने खूबसूरत विचारों से हमारे मन को खिलखिला और खुशनुमा बनती हैं . जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमें प्रेरित करती हैं . आइये जानें कुछ महान लोगों की नजरों में पुस्तकों पर उनके विचार —

महात्मा गाँधी – पुस्तक का मूल्य रत्नों से भी अधिक है, क्योंकि रत्न बाहरी चमक – दमक दिखाते हैं जबकि पुस्तकें अन्त : करण को उज्ज्वल करती हैं .

प्रेमचंद – जिनकी माकूल आमदनी है वे भी पुस्तकों की भिक्षा मांगने में नहीं शरमाते .

लोकमान्य तिलक – मैं नरक में भी अच्छी पुस्तकों  का स्वागत करूंगा, क्योंकि उनमें वह शक्ति है कि वे जहाँ होंगी वहीं स्वर्ग बन जाएगा .

थोरो – पुराना कोट पहनो और नई किताबें पढ़ों .

होरेसमन – पुस्तकों से विहीन घर खिड़कियों से विहीन भवन के सामान है .

जार्ज बर्नार्ड शा – पुस्तक विचारों के युद्ध में अस्त्र का कम करती है .

रस्किन – यदि कोई पुस्तक पढ़ने योग्य है, तो खरीदने के योग्य भी है .

सिसरो – पुस्तक से रहित कमरा आत्मा से रहित शरीर के सामान है .

बनारसीदास चतुर्वेदी – पुस्तक प्रेमी सबसे अधिक धनी और सुखी होते हैं .

कार्लाइल – पुस्तकों का संकलन ही आज के युवक का वास्तविक विधालय है .

अगस्टाईन – बुरी पुस्तकों को पढ़ना जहर पीने के समान है .

टपर – आज के लिए और सदा के लिए सबसे बड़ा मित्र है अच्छी पुस्तकें .

ओडोरपार्कर –  जो पुस्तकें हमें अधिक विचारने को बाध्य करती हैं, वे ही हमारी सबसे बड़ी सहायक हैं  .

सैमुअल स्माइल – बुरी पुस्तकें ऐसा विषय होती हैं, जो समाज में बुराई के बीज डालती हैं .

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