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लकीर-8 संपादक श्री गंगा प्रसाद’अरुण’जी आ उनुकर सुपुत्र भोजपुरी भाषा सेवी राजेश कुमार उर्फ राजेश भोजपुरिया जी के भोजपुरी भाषा के प्रति सम्पूर्ण समर्पण आ सेवा भाव के प्रतीक बा।भारत विविधता में एकता के मूर्त रूप ह।लोकभषन के संरक्षण आ उन्नयन केन्द्र सरकार आ भोजपुरी क्षेत्र के राज्य सरकारन के नैतिक आ ऐतिहासिक दायित्व बा।कवनो भारतीय भाषा राजनीति के शिकार ना होखे के चाहीं।बाकी बिडंबना इहे बा जे जनता जवन ना चाहे उहे सरकार करेली।     बहरहाल, लकीर-8में पठनीय सामग्री अतना बा जे सुरक्षित कहल जा सकेला जे एह में गागर में सागर भरल बा।संपादकीय के अलावे27को रचनाकार लोग के स्तरीय कहानी, ललित निबंध, लघुकथा, आलेख, समीक्षा, कविता, गीत, नवगीत, गजल आदि प्रस्तुत बा।आवरण शिवबहादुर पाण्डेय’प्रीतम’,के कुण्डलिया से सुसज्जित बा।पिछला आवरण पर दिवंगत परमेश्वर दूबे शाहाबादी के कविवर कुंजन जी के नामे एगो पद्यमय खत छपल बा।आवरण पेज अंदर पर शैयद मुहम्मद’शाद’के भोजपुरी गीत’सावन’छपल बा।एह गीत के ऐतिहासिक आ सांस्कृतिक महत्व बा।एगो जमाना रहे जब उर्दू के शाइर भोजपुरीयो में गीत लिखत रहन।अंतिम आवरण के भीतरी पेज पर अमीर खुसरो के मुकरी पढ़त बहुत आनंद आई आ मन करी कि हमहूँ कुछ मुकरी लिखीं।संपादक गंगा प्रसाद अरुण के बिरहा-बगान, अक्षय कुमार पाण्डेय के मनगीत, डॉ बलभद्र के सोहर धुन में कविता आ डॉ रमाशंकर श्रीवास्तव के’द्वंद्व समास’के समीक्षा, आ वरिष्ठ कवि आचार्य सूर्यदेव पाठक’पराग’के त्रिपदी(जनक छंद)उल्लेखनीय बा।कथाकार संजीव के हिंदी कहानी’दुनिया के सबसे हसीन औरत’के भोजपुरी अनुवाद सार्थक बा।एगो महत्वपूर्ण सूची बा216भोजपुरी नाटकन आ ओकर रचनाकारन माने नाटकार लोगन के।शोधार्थी आ नाटक में रूचि राखेवाला खातिर बहुत उपयोगी बा।एगो छोट बह्र में हमरो गजल बा।   संपादक गंगा प्रसाद अरुण जी आ प्रबंध संपादक राजेश भोजपुरिया जी बधाई के पात्र बा लोग आ कथाकार कृष्ण कुमार जी भी जे लकीर-8हमरा के उपलब्ध करवलीं।

  • जितेन्द्र कुमार

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