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– कालजयी ‘घनश्याम’

 

गजल

 

वतन के लिए ही जतन ज़िंदगी है
वतन ही मेरा जानेमन ज़िंदगी है

चलें हम उड़ा और लहरा तिरंगा
किया देश ने अब नमन ज़िंदगी है

सलामत रहे गर ये सरहद हमारी
तो फिर देश भर में अमन ज़िंदगी है

हमें रात दिन ख़्वाब सरहद की आए
हमारे लिए खुश चमन ज़िंदगी है

अगर देश के काम आए जवानी
तो है राग बादल यमन ज़िंदगी है

तड़कते भड़कते सुरंगों में मस्ती
ये बारूद की अंजुमन ज़िंदगी है

तिरंगा में लिपटूं ये चाहत है मेरी
ये ‘घनश्याम’ तेरा कफ़न ज़िंदगी है .

 

  • नई दिल्ली

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