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कविता और जीवन दोनों की सादगीपूर्ण साधना ही कवि-धर्म: रामदरश मिश्र

मार्च 3, 2022, नई दिल्ली| वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामदरश मिश्र के आवास पर दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े प्राध्यापक डॉ. वेद मित्र शुक्ल कृत सॉनेट-संग्रह एक समंदर गहरा भीतर का लोकार्पण श्री मिश्र एवं प्रख्यात आलोचक व कवि डॉ. ओम निश्चल द्वारा किया गया| इस दौरान कवि व दोहाकार नरेश शांडिल्य, प्रोफ़ेसर स्मिता मिश्र, डॉ. जसवीर त्यागी, समकालीन अभिव्यक्ति के संपादक हरिशंकर राढ़ी, ग़ज़लकार शशिकान्त, रविशंकर सिंह तथा उज्जवल शुक्ल मुख्य रूप से उपस्थित रहे|

पुस्तक-लोकार्पण के बाद सॉनेट-संग्रह पर एक परिचर्चा का भी आयोजन किया गया| इसका शुभारंभ लेखक श्री शुक्ल द्वारा अपने संग्रह से “माँ, धरती, बादल-सा” और “मजबूरी में मज़दूरी, पर स्वाभिमान से” शीर्षक से दो प्रतिनिधि सॉनेटों के काव्यपाठ से हुआ| मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. ओम निश्चल ने जहाँ एक ओर 126 सॉनेट वाले संग्रह एक समंदर गहरा भीतर को सुकवि त्रिलोचन की परंपरा में समकालीन हिंदी कविता में महत्वपूर्ण योगदान बताया तो वहीँ गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे डॉ. रामदरश मिश्र ने पुस्तक के लेखक को सॉनेट छंद के माध्यम से जीवन और कविता दोनों को सादगी के साथ साधने के लिए बधाई देते हुए कहा कि विधा कोई भी हो, शैली कोई भी हो उसमें लेखक ही अपने ईमानदार अनुभवों, भावों और दृष्टि के साथ व्याप्त रहता है| इन सॉनेट में आज के समय में मनुष्यता को आहत करने वाले क्रिया व्यापारों पर वेद मित्र ने बार बार व्यंग्य किये हैं और मूल्यों को भी रूपायित किया है| साथ ही, राजनीति और आमजन के संबंधों की भी पहचान की है|

परिचर्चा में भाग लेते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज में प्रोफेसर डॉ. स्मिता मिश्र ने महानगरीय जीवन की कृत्रिमता के प्रतिवाद में उकेरे गये सहज ग्रामीण जीवन तथा सहज रचनात्मक लय से युक्त सॉनेटों को पढ़ते हुए उनके महत्व पर प्रकाश डाला| लोकप्रिय कवि नरेश शांडिल्य ने वेद मित्र के सॉनेटों को भारतीय मूल्य, परिवेश, परंपरा आदि से ओतप्रोत बताया| व्यंग्यकार हरिशंकर राढ़ी ने इस हिंदी सॉनेट-संग्रह को विदेशी जमीन पर सफलतापूर्वक रोपा गया देशी पौधा बताते हुए कृति को हिंदी कविता का ही विस्तार माना| डॉ. जसवीर त्यागी ने संग्रह से रचनाएँ पढ़ते हुए वैविध्यपूर्ण कथ्यों को पुस्तक की पठनीयता और रोचकता को बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कारक बताया| कार्यक्रम का सफल संचालन प्रोफेसर डॉ. स्मिता मिश्र द्वारा किया गया|

 

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