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प्राकृतिक सौंदर्य को अपनी कलाकृतियों में
समेट रखा है चित्रकार औऱ कवयित्री रुचि ने! : सिद्धेश्वर
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” हुनर हो तो सोशल मीडिया पर
सबका स्वागत है!”: रुचि बाजपेयी शर्मा
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पटना : 04/07/2022! रुचि बाजपेयी शर्मा की कलाकृतियों में अद्भुत रंगों का संयोजन हुआ है l अपने भीतर की भावनाओं की अभिव्यक्ति बहुत बारीकी से अपने चित्रों में उकेरा है रुचि ने l नर नारी के मिलन की भाव अभिव्यक्ति भी इतने कलात्मक ढंग से उन्होंने प्रस्तुत की है, कि वे हमारी दृष्टि को इस तरह थाम लेती है, कि हम कुछ और अगल-बगल की चीजें देख नहीं पाते l यही एकाग्रता कलाकार को विख्यात बनाती है l एक चित्र में नदी की बहती हुई धारा को थोड़ी सी रंगों के माध्यम से बड़ा कैनवास के रूप में प्रस्तुत किया है रूचि ने l प्राकृतिक सौंदर्य को अपनी कलाकृतियों में
समेट रखा है चित्रकार औऱ कवयित्री रुचि ने!”
भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के तत्वाधान में फेसबुक के ” अवसर साहित्यधर्मी पत्रिका ” के पेज पर, हेलो फेसबुक चित्रकला एवं संगीत सम्मेलन का संचालन करते हुए संस्था के अध्यक्ष सिद्धेश्वर ने उपरोक्त उद्गार व्यक्त किया l उन्होंने कहा कि – पेशे से रूचि बाजपेयी शर्मा भी बी एड कॉलेज में अकाउंटेंट हैं और साथ ही साथ अपने परिवार की सारी जिम्मेदारियों को संभालते हुए, रुचि पब्लिकेशन की निर्देशिका भी है l इसी पब्लिकेशन से प्रकाशित सचित्र मासिक पत्रिका हस्ताक्षर का संपादन भी कर रही हैं l पत्रिका का संपादन कौशल देख कर ही लगता है कि यह किसी कलाप्रेमी संपादक के हाथों प्रकाशित की जा रही है l रुचि बेहतरीन कविता लिखने में भी गहरी रुचि रखती है, और रुचि की तीन काव्य पुस्तकें प्रकाशित होकर अमेजॉन पर उपलब्ध है, तो कुछ काव्य कृतियाँ प्रकाशनाधीन है l रूचि कवि कुंभ की उपाधि प्राप्त कर,कालिदास लिटरेचर अवार्ड भी प्राप्त कर चुकी है l मुंबई की फिल्म राइटिंग एसोसिएशन की मेंबर तो है ही, इनके द्वारा कबीर पर लिखा ब्लॉग भी लंदन के लेखनी ब्लॉग में मशहूर हुआ है l प्रकृति प्रेमी, नोवेलिस्ट रुचि जी,मिसेस इंडिया 2021 भी प्राप्त कर चुकी है l
मुख्य अतिथि रुचि बाजपेयी शर्मा (म. प्र.), कवयित्री एवं चित्रकार के साथ साथ, रुचि पब्लिकेशन की निर्देशिका और हस्ताक्षर पत्रिका के संपादक से ऑनलाइन भेंटवार्ता ली सिद्धेश्वर ने l विदित हो कि रुचि मिसेज इंडिया 2021की खिताब भी जीत चुकी है l भेंटवार्ता के दौरान एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि – सिद्धेश्वर जी क़े द्वारा ली जा रही ऑनलाइन भेंटवार्ता और साहित्यिक गोष्ठीयाँ सीधे-सीधे जनमानस से जोड़ती है l ” अवसर सहित्यधर्मी पत्रिका ” के फेसबुक पेज पर जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बिहार के पाठक,दर्शक कला एवं साहित्य से खास लगाव रखते है। आज़ सिद्धेश्वर जी से,चित्रकला,साहित्य फैशन आदि पर सार्थक चर्चा हुई। प्रश्न जो मुझसे पूछे गए वह अपने आप मे किसी जवाब का प्रतिरूप थे।
आर्ट एवं लेखन आज अपने चरमोत्कर्ष पर है। क्योंकि उसे सोशल मीडिया का खुलकर कर सहयोग,साथ औऱ प्रोत्साहन मिल रहा है l ” अवसर पत्रिका ” की खास मुलाकात में हमने यह पाया कि हमारे पास सिर्फ हुनर होना चाहिए l यहाँ सभी का स्वागत है। उन्होंने आगे कहा,”मैंने कुछ गीत भी सुने,नृत्य देखे,अनमोल संचालन के साथ दर्शकों का स्नेह भी पाया। मैं हर विधा में लिखने के साथ, हर आर्ट को पेंटिंग में उपयोग करती हूं। जबकि कोई प्रशिक्षण प्राप्त नही किया। रेखाचित्र में सिद्धेश्वर जी का कोई जवाब नही,वह एक उत्कृष्ट चित्रकार है।”
हस्ताक्षर पत्रिका के संपादन के दौरान बहुत ही उम्दा लेखको से चर्चा हुई।हस्ताक्षर ने बिहार के अनेक लेखको को शामिल किया, और खुशी है कि अनेक जुड़े भी। आज़ की ऑन लाइन चर्चा से भविष्य के ऑन लाइन साहित्य के मौके बढ़े है। मैं हमेशा बिहार के साहित्य से जुड़ना चाहूंगी l”
” मन्नतों के पेड़ पर हम इस बार
दिल ही अपना बांध आये हैँ ।”
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में अपूर्व कुमार ( वैशाली ) ने कहा कि – मध्य प्रदेश की प्रतिष्ठित कवयित्री और चित्रकार रुचि वाजपेयी शर्मा की चित्रकारी में मुझे पस्तर प्रतिमा की एक गंधर्व कन्या वाली जीवंत कृति के साथ-साथ महात्मा बुद्ध की कृति अधिक पसंद आई l दो नारियों वाली आयल पेंटिंग भी आकर्षक है l संसार के सौंदर्य के बीच रुचि की कलाकृति संस्कृति के विभिन्न आयामों को आत्मसात करता है l यद्यपि आज का कार्यक्रम आदरणीया रुचि बाजपेयी शर्मा के चित्रकला पर केंद्रित रहा तथापि मैं आपको यह बतलाता चलूं कि ये भी सिद्धेश्वर सर की तरह ही कला के साथ-साथ साहित्य की विभिन्न विधाओं में अपना जलवा बिखेर रही हैं। अब संगीत इन से अछूता है या नहीं यह मैं नहीं जानता !

मैंने इनकी जिन कलाओं को देखा है,उसके आधार पर यह कह सकता हूं कि इनकी कृतियों का आधार तैल चित्र अर्थात आयल पेंटिंग है। ये तैल चित्र की रचना में ब्रश के साथ-साथ यदा-कदा नाइफ का भी प्रयोग करती हैं। इनकी कृतियों में एक्रेलिक पेंटिंग तकनीक का भी प्रयोग है।

इनकी विभिन्न चित्रकारियों में मुझे प्रस्तर प्रतिमा की एक गंधर्व कन्या वाली जीवंत कृति के साथ-साथ महात्मा बुद्ध की कृति भी बहुत प्रेरक लगी। बुद्ध के साथ एक कमल की आकृति, कमल की भांति ही *संसार में रहते हुए, संसार से निर्लिप्ततता की स्थिति बनाए रहने की प्रेरणा देती है। शायद तभी बुद्ध की भांति हम भी परम शांति को पा सकेंगे!इनकी दो नारियों वाली आयल पेंटिंग से ऐसा लगा मानो एक वेद धारण की है तो दूसरी वेदना l इनकी दो कृतियों में पीले, रक्तिम आधार के ऊपर, श्वेत पुष्पगुच्छ हैं। वह भी मुझे आकर्षक लगी।वह मानो ऐसा कह रही हो कि-
“संसार की रंगीनियों के बीच हम भारतवासियों को सादगी की संस्कृति की सर्वोत्कृष्टता को आत्मसात करना है।”
विशिष्ट अतिथि ऋचा वर्मा ने कहा कि कवयित्री एवं कलाकार रुचि क़े चित्रों को ध्यान से देखने पर गौतम बुद्ध, वैशाली..जो विश्व का पहला गणतंत्र है, वहां की नदी और आम्रपाली सारे शब्द दिमाग में कौंधने लगते हैं, और लगता है इस चित्र के द्वारा कलाकार ने इतिहास में झांकने की कोशिश की है। इन सबके अलावा अल्पना, फुलकारी, डायनिंग टेबल पर करीने से रखे ग्लास, ये सारे चित्र देखने में सहज बहुत सुंदर और हमारी जिंदगी और हमारी संस्कृति से प्रेरित हैं।एक चित्र में एक स्त्री और एक पुरुष का चित्र छतरी लिए हुए अपने आप को वर्षा से बचाते हुए । दोनों के पृष्ठ भाग को ही उकेरा गया है। चित्र देखते ही आपको राज कपूर और नरगिस दत्त की याद आ जाएगी ,कानों में गूंजने लगेंगे गीत की पंक्तियां “प्यार हुआ इकरार हुआ..।”
उसके बाद के लगातार दो चित्र। एक चित्र में एक स्त्री दीप लिये हुए, और दूसरी उसकी अगली पीढ़ी की स्त्री अपने हाथ में पुस्तक लिये हुए, साथ ही के चित्र में दो बच्चे पुस्तक पढ़ते हुए। इन दोनों चित्रों का संदेश शायद यह कि ज्ञान और शिक्षा का दीप जलाने से ही जग में प्रकाश छायेगा। इसके अलावा भी पनिहारिनों की तस्वीरें, जिनके घूंघट ,सर पर घड़ा और मरूभूमि का बैकग्राउंड हमें वैशाली से सीधे राजस्थान ले जाता है। और राजस्थान से सीधे चलिए पहाड़ों पर जहां ठंड के मौसम में तीन लोग बैठकर ढ़ोलक पर थाप दे रहे हैं।
राधा और मोरपंखी कृष्ण की कलात्मक तस्वीर शायद मथुरा और वृंदावन की याद दिला दें।
कलाकार की कूंची देस छोड़ परदेस तक जाती है,लैंप पोस्ट के पास पाश्चात्य नृत्य के पोज में तन्वंगी युवती को देख आपको मेरी बात पर यकीन हो जाएगा।
इनके अन्य चित्रों को देखकर भित्ति चित्रों की याद आ जाती है। पेड़ के पत्तों को सफेद और गुलाबी रंग से रंगा गया है।ये भित्ति चित्र बहुत कुछ बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में शादी -विवाह के मौकों पर बनाए जाने वाले कोहवर से प्रभावित दिखतें हैं।
युवा कवयित्री राज प्रिया रानी ने कहा कि -आज की साहित्यिक गोष्ठी में चित्रकला प्रदर्शनी आयोजित की गई और आज की मुख्य अतिथि के रूप में कलाकार, रेखाचित्रकार आदरणीया रुचि वाजपेयी शर्मा को आमंत्रित किया गया है। जो कलासिद्ध रेखाचित्रकार भी हैं और एक साहित्यकार भी। क्योंकि वाजपेयी जी की बोलती कलाकृतियां अपने कई भाव को उभार रही है समाज की कई मनोदशा से रूबरु करा रही है।जिसमे स्त्री जीवन के कई संवेदनशील भाव , उमंग उल्लास भाव को संप्रेषित कर रही भावनाएं उद्भाषित होती नजर आ रही है।
रुचि वाजपेयी शर्मा जी की बोलती कलाकृतियां अपने कई भाव को उभार रही है l समाज की कई मनोदशा से रूबरु करा रही है।जिसमे स्त्री जीवन के कई संवेदनशील भाव , उमंग उल्लास भाव को संप्रेषित कर रही भावनाएं उद्भाषित होती नजर आ रही है। रुचि जी की चालीस से अधिक क्लाकृतियां इस तथ्य को स्वीकारने में सक्षम है कि उनकी लगनशीलता, कला के प्रति प्रेम प्रखरता सहज रूप से प्रदर्शित हो रही है। प्रतिभा की सुगंध काम के डिवोशन में छिपी होती है और रुचि जी की स्पष्ट निष्ठा कला में स्वयं को निखारने में सफल है।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में संगीतमय प्रस्तुति के आरंभ में मुरारी मधुकर ने “चुप है धरती चुप है चांद सितारे!” गीत को अपना स्वर दिया l तथा चित्रकला सम्मेलन के बारे में कहा कि – रुचि बाजपेई की कलाकृति उनके नाम के अनुकूल मनमोहक है!”
मीना कुमारी परिहार ने -” मेरे महबूब में क्या नहीं? ” पर नृत्य प्रस्तुत किया l तो दूसरी तरफ सिद्धेश्वर ने मोहम्मद रफ़ी के गाए गाने ” सलामत रहो” पर अभिनय प्रस्तुति दिया! विश्व विख्यात नृत्यांगन अनु सिन्हा का कथक नृत्य प्रस्तुत किया गया l समृद्धि गुप्ता ने ” प्यार का पहला खत लिखने में वक्त तो लगता है! “/ डॉ शरद नारायण खरे (म. प्र.) ने -मांझी नैया ढूंढे किनारा!”/ गजानंद पांडे ने – वो शाम कुछ अजीब थी औऱ मधुरेश नारायण ने -” ये ख्याल आया ” फिल्मी गीत को अपने स्वर में प्रस्तुत कर श्रोताओं का मनमुग्ध कर दिया है l
इनके अतिरिक्त अशोक चक्रधर,कीर्ति काले, सपना शर्मा, चाहत शर्मा, अंजना पचौरी, पुष्पा शर्मा,पुष्प रंजन , नीरज सिंह, संतोष मालवीय,दुर्गेश मोहन,सुनील कुमार उपाध्याय आदि की भी दमदार उपस्थिति रही l

🔷💠 प्रस्तुति :ऋचा वर्मा (उपाध्यक्ष ) / एवं सिद्धेश्वर ( अध्यक्ष )भारतीय युवा साहित्यकार परिषद ////// मोबाइल :92347 60365

2 thoughts on “प्राकृतिक सौंदर्य के साथ कलाकृति”
  1. रुचि जी की साहित्यिक रचनाएं और रंग बिरंगी चित्रकारी के साथ और भी प्रतिभाओं की गुणी है।अपने जॉब के प्रति समर्पित तो हैं ही,साथ ही मिसेज इंडिया परफेक्टनिश का खिताब भी उनके नाम है।रुचि जी इसी तरह ऊंचाइयों को छूती रहे,यही कामना है।

  2. धन्यवाद,अवसर पत्रिका टीम का।

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