Category: सोशल साइट / वेबिनार

साहित्य + स्वत : सुखाय + छपास + नाम = पारिश्रमिक ठनठन पाल

    लेखक कलम का मजदूर है तो, रचना का प्रकाशन औऱ परिश्रमिक उसकी मजदूरी है !: सिद्धेश्वर पटना !…

अधिकांश लेखकों का मानसिक और आर्थिक शोषण हो रहा है : सिद्धेश्वर

एक नया एपिसोड : तेरे मेरे दिल की बातें अधिकांश लेखकों का मानसिक और आर्थिक शोषण हो रहा है l…

कौशलेश पांडे की कलाकृतियों में भाव भंगिमा तथा रंगों का संतुलित संयोजन है- सिद्धेश्वर

    कौशलेश पांडे की कलाकृतियों में भाव भंगिमा से लेकर रेखाओं – रंगों का संतुलित संयोजन है!: सिद्धेश्वर “”””””””””””””””””””””””””””””'””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””…

लघुकथा, लघु और सृजन कठिन

      सकारात्मक सोच को एक नई दिशा देती है अंजू अग्रवाल की लघुकथाएं ! : सिद्धेश्वर! “””””””””””””””””””””””””””””””””””””””” लघुकथा…

सावन गीत प्रकृति का अद्भुत संगीत : सिद्धेश्वर

    सावन का गीत प्रकृति का अद्भुत संगीत है!: सिद्धेश्वर “””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””‘ ” हाथी ना घोड़ा ना कौनो सवारी, हे…

साहित्य की कलम + संवेदनाओं की स्याही + आत्मा की नीब = प्रेमचंद रचना संसार

  हमारे देश की सभ्यता संस्कृति और नैतिक मूल्यों की दृष्टि से प्रेमचंद आज भी प्रासंगिक है!: सिद्धेश्वर ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, सोशल…

हिंदी ग़ज़ल की लोकप्रियता और समकालीन कविता

  🔷 परिचर्चा ♦️ प्रस्तुति : सिद्धेश्वर 🌀 हिंदी ग़ज़ल की लोकप्रियता और समकालीन कविता 🌀 उर्दू गजल यानी परंपरागत…

ईमानदार और जानकार समीक्षकों का आज भी अभाव

” लघुकथाकारों को दिशा निर्देश देना ही लघुकथा समीक्षकों की उपादेयता है!”: सिद्धेश्वर “””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””” ” ईमानदार और जानकार समीक्षकों का…