Spread the love

 

 

– महेन्द्र “अटकलपच्चू”

थक गया हूं रोटी के पीछे भाग भाग कर
थक गया हूं दिन रात जाग जाग कर
करूंगा अब अपने हाथों से मेहनत
थक गया हूं अपने से भाग भाग कर।।

रुक जा अब तो अपने से मत भाग
हो गई सुबह अब नींद से जाग
कर कुछ काम इस दिन में
गई रात अब जाग अब जाग।।

व्यर्थ न गवां इस दिन को
न कर नष्ट इस क्षण को
गया पल न वापिस आता फिर
मेहनत से रोशन कर इस पल को।।

जिसे प्यार नहीं इस जीवन से
हार गया वो इस जीवन से
थक कर भी आगे बढ़ा जो
जीत गया वो तन मन से।।

बढ़ोगे आगे तो कांटे चुभेंगे जरूर
रुख हवा के बाधक बनेंगे जरूर
मत डर लहरों से ओ राही
चीर लहरों को मंजिल मिलेगी जरूर।।

Leave a Reply

Your email address will not be published.