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– अरुण निशंक

 

 

♦   साथी तू निगाहों में हो

दिल की पनाहों में हो

काश की तुम मेरी

बांहों में हों !

 

♦   तू हर सफर हर मंजिल पे मिले

किश्ती में मिले, साहिल पे मिले

गर कोई चिर कर देखे

तू मेरे दिल में मिले !

 

♦     वफा निभाने वालों को ताउम्र

परेशान देखा है

बेवफाओं के होंठों पर

अक्सर मुस्कान देखा है !

 

♦       मेरा मुकद्दर रूठ गया

दिल शीशा था टूट गया

ऐसी चली गम की आंधी

कि राह में साथी छूट गया !

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