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“फूल सा खिलना है तो वसंत से कर लो दोस्ती !”: सिद्धेश्वर

 

कोलकाता :10/02/2022 ! वसंत ऋतु पर शैलजा सिंह (गाज़ियाबाद ) ने -” दिल यूं ही गुनगुनाए तो समझो वसंत है।/ मन फूल सा खिल जाए, तो समझो वसंत है।/सपनो को लगे पंख, देखो उड़ चला है ये!/जब कंत घर आ जाए तो समझो वसंत है।”/  प्रेम भारद्वाज (नई दिल्ली) ने -” जिन्हें कालजई बनना है यहां, वे जीने मरने से नहीं डरते, जो धूप में चलना सीख लिए, उनके पांव नहीं जलते !”/ सिद्धेश्वर ने -“फूल सा खिलना है तो, वसंत से कर लो दोस्ती,  सूखे फूल की तरह मुरझाना अच्छा नहीं!/ गीत बनकर पवन से कर दो चार बातें !/ खामोशी में भीतर से टूट जाना अच्छा नहीं l”/ निशा राय ( गोरखपुर) ने -”  मन की अंगड़ाई में मंझरिया आई है !/ कौन दे गया इसे बसंत ?/ जिया पछुआ बन डोले !”

देश विदेश के चर्चित कवियों ने, एक से बढ़कर एक वसंत से संदर्भित कविताओं का पाठ कर,  वसंत का भरपूर स्वागत किया l  मौका था, अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक संस्था “रचनाकार” के तत्वाधान में आयोजित काव्य वसंतोत्सव का l अध्यक्ष सुरेश चौधरी के नेतृत्व में,  फेसबुक एवं यूट्यूब पर आयोजित ऑनलाइन  काव्य गोष्ठी में उपरोक्त कवियों के अतिरिक्त  मुख्य अतिथि शशि शुक्ला (कानपुर),  चेतना अग्रवाल (अहमदाबाद ), सरिता शर्मा (केन्या )और  प्रगति टिपनिस (मास्को, रूस ) ने भी अपनी कविताओं से समा बांध दिया,  जिसे देर रात तक दर्शकों ने खूब सराहा,  अपनी प्रतिक्रियाएं भी  व्यक्त किया l  इस पूरे वसंतोत्सव काव्य गोष्ठी का सशक्त संचालन किया, मास्को (रूस ) से प्रगति टिपनिस और पटना से सिद्धेश्वर ने l

सभी कवियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन करते हुए संयोजक एवं अध्यक्ष सुरेश चौधरी ने कहा कि -“ऋतुओं में वसंत ऋतु की शोभा सबसे निराली होती है, जिसे हमारे कवियों ने अपनी कविताओं में ऋतुराज के रूप में अंगीकार किया हैं l प्रकृति के अनुपम सौंदर्य,  आज पढ़ी गई इन कविताओं में भी विद्यमान दिखती है l”

प्रस्तुति :  आराधना प्रसाद  (प्रांतीय अध्यक्ष ) “रचनाकार” (बिहार)

मोबाइल :9234760365

 

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