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    -डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्ल

 

 

“यू नो… आज हिंदी डे है। इसे हम इसलिए मनाते हैं कि हम सभी की यह नेशनल लैंग्वेज है। हमारे फोरफादर इसी में बातें करते थे। सब कहते हैं कि हिंदी ने सारे देश में यूनिटी पैदा की तब अपनी कंट्री को फ्रीडम मिली। … अच्छा बच्चों, बताओ कि हम हिंदी डे क्यों मनाते हैं?”

“मैडम यह हमारी नेशनल लैंग्वेज है!”

“यस…!”

“अच्छा, बताओ फादर आफ नेशन गांधीजी हिंदी के लिए क्या कहते थे?”

“बिना नेशनल लैंग्वेज हिंदी के देश गूंगा है! हमारे देश की प्रोग्रेस इसके बिना इनकंप्लीट ही मानी जाएगी।”

“गुड… बहुत अच्छा!”

“तो फिर मैडम हमें स्कूल में हिंदी में बात करने पर सजा क्यों देते है?”

“माय चाइल्ड..! तुम्हारे मम्मी, पापा ने तुम्हें इस पब्लिक स्कूल में स्टडी करने क्यों भेजा?”

“मैडम, ताकि हमारी अंग्रेजी अच्छी हो!”

“अंग्रेजी अच्छी होगी तो उससे तुम्हें क्या फायदा मिलेगा?”

“मैडम, अच्छी नौकरी मिलेगी… सोसाइटी में इज्जत बढ़ेगी… हमारा फ्यूचर बनेगा!”

“यस…! इसलिए हिंदी को रिस्पेक्ट देने के लिए हमारे स्कूल में सिर्फ आज के दिन हिंदी में बोलने की छूट मिलती है! बाकी दिनों में हम तुम्हारे भविष्य बनाने के लिए हिंदी में बात करने वाले बच्चे को पनिश करते हैं।”

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