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” न न करते, हम नया साल से दिल लगा बैठे !”
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” प्रकृति और जीवन के अनुपम कलाकार हैं सच्चिदानंद किरण !” : सिद्धेश्वर
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लकीर को मिटाने की कोशिश ही, हमारे भीतर की ताकत और प्रतिबद्धता की कसौटी है !”:डॉ बी एल प्रवीण
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कला हमारे जीवन की मौलिक पहचान है ! जल, हवा पेड़, पशु, पक्षी, नदी, पहाड़, सागर, धरती, आसमान बादल.कहां नहीं है कला का सौंदर्य ? कला हमारे जीवन, हमारे प्रकृति के पोर पोर में समाया हुआ है l बस हमारे अंदर वह अनुभूति, वह सुक्ष्म दृष्टि होनी चाहिए, जो जीवन और प्रकृति के इस सौंदर्य को कागज के कैनवास पर उतार सके l जो रंगों की छटा को इंद्रधनुषी आकार दे सके l ”
भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के तत्वाधान में ,फेसबुक के “अवसर साहित्यधर्मी पत्रिका ” के पेज पर,ऑनलाइनआयोजित ” हेलो फेसबुक चित्रकला सम्मेलन ” की अध्यक्षता करते हुए कवि चित्रकार सिद्धेश्वर ने उपरोक्त उद्गार व्यक्त किया !
वयोवृद्ध कलाकार सच्चिदानंद किरण की कलाकृति प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि -” प्रथम दृष्टि में ही सच्चिदानंद किरण की कला में जो सौंदर्य बोध हमें आकर्षित करती है, वह है रंगों और आकार के प्रति एक नए प्रयोग की l और इस प्रयोग की दिशा में सच्चिदानंद किरण एक बेहतर कलाकार के रूप में हमारे सामने आते हैं l उनकी यह कलात्मक सक्रियता निश्चित ही उन्हें कला के उस मुकाम तक पहुंचाएगी जहां कलाकार अपनी मौलिक छवि छोड़ जाता है l प्रकृति और जीवन के अनुपम कलाकार हैं सच्चिदानंद किरण l ”

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में ” मेरी पसंद,आपके संग ” का संचालन करते हुए, नए वर्ष के स्वागत में सिद्धेश्वर ने कहा कि-” सब कुछ अस्वीकारते हुए भी, हम बहुत कुछ स्वीकार लेते हैं l अस्वीकृति में उठी कलम, स्वीकृति का हस्ताक्षर कर देती है l बार-बार ठुकराने की चाहत में, कहीं ना कहीं से हम उसके साथ जुड़ जाते हैं lअगर ऐसा नहीं है तो, नए वर्ष की उपेक्षा करते हुए भी, नए वर्ष की पहली तारीख से ही नए वर्ष की गणना शुरू कैसे कर देते हैं ? अपने सारे रूटीन नए साल के नए कैलेंडर के हिसाब से शुरू कर देते हैं ! यानी न – न करते करते हम नए वर्ष का स्वागत कर ही बैठे ! नए वर्ष से दिल लगा बैठे l ”
विशिष्ट अतिथि डॉ शरद नारायण खरे ( म.प्र.) ने कहा कि -नये वर्ष में मेरा संकल्प यही है कि 2022 में कुछ नया करना ही है।चाहे समय पर जागना-सोना नियंत्रित करूँ,चाहे खाना-पीना, चाहे योग-व्यायाम करना,चाहे लेखन में अधिक गतिशीलता लाना या चाहे कोई अन्य !”
डॉ. बी एल प्रवीण(डुमरांव)नए कहा कि -” बेधड़क और बेबाक राय उपस्थापित करते हुए छुपे हुए सच को सामने लाते रहने की कोशिश में, नया साल पर सिद्धेश्वर जी का यह आख्यान प्रशंसनीय है। दरअसल इसी लकीर को मिटाने की कोशिश ही भीतर की ताकत और प्रतिबद्धता की कसौटी बन जाती है। ”
. इस कार्यक्रम में नए साल के स्वागत में गीत, गजल, कविता और फिल्मी संगीत की रंगारंग प्रस्तुति दी गई l गजानन पांडे( हैदराबाद )और सिद्धेश्वर ने फिल्मी गीत गुनगुनाया, तो दूसरी तरफ मीना कुमारी परिहार ने लोक गीत पर नृत्य के बेहतरीन प्रस्तुति दिया !

 

आरती कुमारी ( मुजफ्फरपुर) ने -” नए साल की गर्माहट में पुरानी, सर्द यादों को ना भूल पाएंगे हम,नए वसंत की खुशबू में पुराने मसले फूलों को ना भूल पाएंगे हम !”/ऋचा वर्मा ने -” कितनी बार आंखें बरसी, कितनी बार दिल घबराया !,पर हाय रे, ना किसी ने आंसू पोछें, ना गले लगाया !”/ डॉ शरद नारायण खरे ने -” नया काल है, नया साल है, गीत नया हम गाएंगे!, करना है कुछ नवल- प्रबल अब, मंजिल को हम पाएंगे !”/ सिद्धेश्वर ने-” नया साल, नई उमंगे, नए स्वप्न, नए संकल्प, नया गीत, नई ग़ज़ल गुनगुनाती है जिंदगी !”
राज प्रिया रानी ने-” नूतन वर्ष की नई अंगड़ाई, नवीन उत्कर्ष भर आई, सुबह कड़कती शत में, सपन अंकुरित हो आई!”/ पुष्प रंजन ने -” चलो चलें हम दो परिंदे बनके, धरा से कहीं दूर अकेले अंबर में !”/प्रियंका त्रिवेदी ( बक्सर )ने -“यह नव वर्ष हमारा है ही नहीं, हमें इसे मनाना है ही नहीं! ठंड से ठिठुरते लोग दिखे, भूख से तड़पते किसान दिखे !” और हरि नारायण हरि( समस्तीपुर) ने “नए वर्ष का स्वागत है, स्वागत उसका जो आगत है !,केवल खुद की खातिर ना मरे, जो सबके लिए तथागत है !” जैसी कविताओं का पाठ कर नया साल का भरपूर स्वागत किया !
इसके अतिरिक्त दुर्गेश मोहन, खुशबू मिश्रा, उमाकांत भट्ट, मधुबाला कुमारी, डॉ सुनील कुमार उपाध्याय, संजय रॉय, अनिरुद्ध झा दिवाकर, बीना गुप्ता, स्वास्तिका, पूनम कटरियार, अभिषेक श्रीवास्तव आदि की भी भागीदारी रही ! इस यादगार कार्यक्रम को देश भर के 300से अधिक लोगों ने देखा और 200 से अधिक लोगों ने कमेंट किया l

=( प्रस्तुति: ऋचा वर्मा (, सचिव)एवं सिद्धेश्वर ( अध्यक्ष) : भारतीय युवा साहित्यकार परिषद {मोबाइल: 9234760365 }
Email :[email protected]

(  कॉपीराइट – कलाकृति : सच्चिदानंद किरण )

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