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– विद्या शंकर विद्यार्थी

निर्गुन
पियवा बहरवा जाले, सुन करी घरवा जाले
किया हो रामा,
पिया के दरदिया कलपावेला ए राम, किया …।
दाना नाहीं पानी पिहीं, सुगनी पियासल जिहीं
किया हो रामा,
केहू ना बलम के बतलावेला ए राम, किया …।
चकरी चलावत बानीं, गगरी मोलावत बानीं
किया हो रामा,
कोंहरा नू भइया समझावेला ए राम, किया ….।
हंसा ई अकेले जाला, संग नाहीं ले ले जाला
किया हो रामा,
जोगिया नगरिया गीतिया गावेला ए राम ….।
केहू ना बलम के रोके, आपन ना पराया होके
किया हो रामा,
सभे ना नयनवा छलकावेला ए राम, किया ….।

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