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– विद्या शंकर विद्यार्थी

लोक गीत
रथवा प लेई भागल सीया के रवनवा,
जोहत बाड़े ना,
राम मने मने बनवा,जोहत ….।
रहिया के लोगवा से पूछे हो बेयनवा
अंसुआ टघरऽताड़े दूनों हो नयनवा
सुधियो ना देता केहू पतवो ठेकनवा,जोहत।
सरगो ना लिली त पतालो ना पचाई
केहू कहां लेई जाके सीया के छुपाई
धुरियो गिनावत नइखे पग के निशानवा,जोहत।
काई हम जबाब दिहब घरवा में माई के
कहां अइलीं उनुकर हम बहुआ गंवाई के
जिनिगी के परल बउए आगे के पलनवा,जोहत
आगे हो जटायु मिलले पंखिया पसरले
नभ रहिया सीया के रवनवा हो हरले
छुटऽता तऽ छुटऽता हुलऽसता परनवा,जोहत।

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