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“साहित्यिक गोष्ठियों से हम रचनात्मक ऊर्जा लेकर, सार्थक सृजन की ओर उन्मुख होते हैं !”: भगवती प्र, द्विवेदी
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“मैं रहूँ आदमी साधारण, पर तुझे दिव्य, देवत्व मिले !” : डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना
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पटना :05/01/2022 ! ” छोटी छोटी साहित्यिक गोष्ठियों में, हम दिल से एक दूसरे की रचनाओं को सुनते हैं !ऐसी गोष्ठियों से हम रचनात्मक ऊर्जा लेकर, सार्थक सृजन की ओर उन्मुख होते हैं l ऐसी ही सार्थक साहित्यिक गोष्ठियां, भारतीय युवा साहित्यकार परिषद के अध्यक्ष सिद्धेश्वर जी करवाते रहे हैं, जो सचमुच अभिनन्दनीय है l
भारतीय युवा साहित्यकार परिषद ( पटना ) के तत्वावधान में वरीय साहित्यकार एवं चित्रकार सिद्धेश्वर जी के निवास ” सिद्धेश सदन “में, एक सारगर्भित काव्य संध्या का आयोजन किया गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे, बेतिया के लब्ध प्रतिष्ठित गीतकार डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना l इस सारस्वत आयोजन की अध्यक्षता करते हुए उक्त उद्गार वरिष्ठ साहित्यकार भगवती प्रसाद द्विवेदी ने व्यक्त किया l
गोष्ठी का संचालन करते हुए संयोजक सिद्धेश्वर ने कहा कि” यह सच है कि ऐसी घरेलू साहित्यिक गोष्ठियां सांस्कृतिक चेतना को जगाते हुए, हमारे भीतर सृजनात्मक ऊर्जा प्रदान करती है ! और ऐसे आयोजन का हमारा उद्देश्य भी यही है l
आज के कार्यक्रम में राष्ट्रकवि स्व रामधारी सिंह दिनकर के पौत्र श्री अरविन्द कुमार सिंह की उपस्थिति महत्त्वपूर्ण रही।अपने गीतों, ग़ज़लों और कविताओं से रचनाकारों ने कार्यक्रम को एक नई ऊंचाई प्रदान की और इस काव्य संध्या को यादगार बना दिया l
डॉ गोरख प्रसाद मस्ताना (,बेतिया ) ने-” सद्भावना,स्नेह, सदविचार में तेरा भी व्यक्तित्व मिले !,मैं रहूँ आदमी साधारण, पर तुझे दिव्य, देवत्व मिले !”/ भगवती प्रसाद द्विवेदी ने -” खरहे-सी भागती उमर,आसरे की डोर कट गई।,मोबाइल ले उड़ा सृजन, नयनों से नींद उड़ गई,,थम जाएँगी कब साँसें, दहशत की फिक्र जुड़ गई।”/डॉ शिवनारायण ने -” जाने कितना उछाल है साहिब, जिंदगी भी सवाल है साहिब !,राह चलते हैं लड़खड़ाते हैं, क्या बुरा हाल है साहिब !”
अरविंद कुमार सिंह (राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के पौत्र ) ने -“प्रेम ख्वाब है, प्रेम एतवार है, प्रेम खुशबू है,प्रेम बयार है। “/मधुरेश नारायण ने -” कमबख्त ये दिल उन्हें देख यूँ ही धडकता है।,ज्यूँ बिना ऑक्सीजन जीव यहाँ तड़पता है।, जख्मी दिल प्यार का मरहम खोजता है यहाँ-वहाँ।,किसी का साथ जग में मिल जाये वह मचलता है।”
सिद्धेश्वर ने -” कुदरत को ऐसा करके दिखा देना चाहिए, इंसान को फरिश्ता बना देना चाहिए!, जब जिंदगी का कोई भरोसा नहीं है दोस्त, वादा अगर किया है निभा देना चाहिए !”/ शरद रंजन शरद ने-” जो लुटा कर अपना सब रचा, उसने दीमकों से बचा रखा, तुझे याद हो जाना याद हो, शरद था मेरा यह सफर, तुम्हें याद हो या ना याद हो !!/ लता प्रासर ने -” लौ चीर अंधेराl निकल पड़ा,उसको डगर नया बनाना है,झिलमिल-झिलमिल रौशन, हर ख़ाब को मंजिल पाना है !”/ डॉ अर्चना त्रिपाठी ने -” ना हो गुमां नश्वर शरीर पर,न नश्वर संसार पर, सब छोड़ हमें चले जाना है, न जाने कौन जहां !”/ राज प्रिया रानी ने -” करबद्ध मेरी अंजुरी, करती है प्रणिपात,मूक प्रणय के वश में, अधरों के जज्बात!,करें खुल कर एक दूजे के, आलिंगन को स्वीकार,कलम जागृति को जगा, करूं जीवन कृतार्थ !” ने गीत गजल और समकालीन कविताओं का पाठ किया गया, जो इस काव्य संध्या को यादगार बना दिया l

आगत अतिथियों का भरपूर स्वागत किया, बीना सिद्धेश ने l लगभग 3 घंटे तक चली इस काव्य संध्या का समापन मधुरेश नारायण द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से हुआ l l

प्रस्तुति :बीना सिद्धेश, द्वारा भारतीय युवा साहित्यकार परिषद (पटना )/ मोबाइल :9 2347 60 365

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