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-डॉ.जियाउर रहमान जाफरी

 

हमारे जितने हैं रिश्ते उदास रहते

हैं

मैं फूल हूं मेरे पत्ते उदास रहते हैं

हमारी नस्ल को ये कैसी बदगुमानी है

ज़रा सी बात पे बेटे उदास रहते हैं

वो सारी उनकी शिकायत हमीं से रहती है

भला ये क्यों मेरे बच्चे उदास रहते हैं

उसे पता ही नहीं है कि कौन अपना है

यही है डर कि परिंदे उदास रहते हैं

कभी तो आके मेरी उस गली को देखो भी

जो तुम नहीं तो दरीचे उदास रहते हैं

ये और कुछ न महज़ क़ातिलों की बस्ती है

यहां पे प्यार के क़िस्से उदास रहते हैं

वहां पे कैसे  पढ़ें प्यार की ग़ज़ल कोई

जहां पे लड़कियां -लडके उदास रहते हैं

 

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