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– अरुण निशंक

चाह नहीं कि दुनिया में

मेरा नाम महान हो जाए

हर पल आपके चरणों में

प्रभु मेरा ध्यान हो जाए .

 

चित्त के दुर्गुणों का मेरे

अतिशीघ्र निदान हो जाए

मान – अपमान में शांत रहूँ

मन मेरा बलवान हो जाए .

 

राग द्वेष से  अनभिज्ञ रहूँ मैं

सुख दुःख सब समान हो जाए

हर साँस सुमिरन बन जाए

तन धर्मार्थ बलिदान हो जाए .

 

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