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– शंभु सुमन

विशेष आर्टिकल

होम लोन की बदौलत महिलाओं को भी मुमकिन अपना घर

आत्मनिर्भर और सशक्त बनने की दिशा में प्रयत्नशील हर औरत चाहती है कि उसका अपना एक घर हो, जिसे अपने मनमुताबिक सजाए—संवारे और भविष्य के बुने सपने को साकार कर सके. इस दिशा में उनके लिए होम लोन काफी हद तक मददगार साबित हो सकता है.

कोई औरत चाहे घरेलू महिला हो, वेतन पाने वाली नौकरीशुदा हों, या फिर अपना रोजगार—कारोबार संभालने वाली सेल्फ इम्पलाईड बिजनेस वुमन. वे बैंकों और इंश्योरेंस कंपनियों के ‘महिला होम लोन’ की स्कीम के बदौलत अपना घर खरीद सकती हैं. उनको केवली अपनी निश्चित और नियमित आमदनी का आकलन करते हुए इसके दस्तावेज तैयार करने होते हैं, ताकि उनके द्वारा लोन की मासिक किस्त का समय पर भुगतान निर्वाधित होता रहे.

महिला होम लोन क्या है?

इस बारे में विस्तार से जानने से पहले यह जान लेना जरूरी है कि होम लोन होता क्या है और इसकी प्रक्रिया किस तरह से पूरी होती है? सामान्य होम लोने और महिला होम लोन में क्या फर्क है?

एक साथ पूरी रकम चुकाकर घर खरीदना हर किसी के लिए संभव नहीं है. खासकर मध्यम वर्गीय परिवार के लिए तो असंभव जैस ही प्रतीत होता है. ऐसे में घर खरीदने के लिए बैंक या नॉन बैंकिेंग फाइनेंस कंपनियां(एनबीएफसी) लंबी अवधि के लिए निश्चित राशि का कर्ज देती है, जिसे 10, 20 या फिर 30 साल तक मूल रकम और ब्याज समेत मासिक किस्त के रूप में चुकाई जा सकती है. सामान्य तौर पर होम लोन किसी व्यक्ति की मासिक आय का 60 गुना होता है. बैंकों का मानना है कि सैलरीड इम्पलाई या फिर पर्सनल बिजनस करने वाला व्यक्ति अपनी कुल आय का 40 प्रतिशत व्यक्तगत खर्च करता है.

वैसे होम लोन अपने घर में रहने की सुविधा के साथ—साथ इनकम टैक्स में बचत की भी सहुलियत देता है. बैंकों द्वारा महिला होम लोन के अलग से किए गए प्रावधान मुख्य तौर पर इसके ब्याज में मिलने वाले छूट के फर्क को लेकर ही है. बाकी कई बातें एक जैसी ही होती हैं. इसके लिए बैंकों ने रिजर्व बैंक के दिशा—निर्देश के अनुसार अपना—अपना फर्मूला तय कर रखा है, जिसमें कमाई, बचत, पहले का कोई लोन, ब्याज का हिसाब, निर्विवादित मकान और लोन की सुरक्षा शामिल है.

अधिकतर बैंकों ने भारत सरकार की पालिसी के तहत महिलाओं को होम लोन के प्रति आकर्षित करने के लिए पुरुषों के मुकाबाले होम लोन के ब्याज में छूट का प्रावधान किया है. इनमें खासकर सरकारी बैकों के अलावा प्राइवेट बैंक भी शामिल हैं.

महिला होम लाने की हकदा

बैंकों और एनबीएफसी द्वारा बनाई नीतियों के आधार पर महिला होम लोन की हकदार गवर्नमेंट या प्राइवेट कंपनियों की सैलरीड महिलाएं, सेल्फ इंप्लॉइड और हाउसवाइफ यानी गृहिणी हो सकती हैं. उनके लिए अलग—अलग शर्तें निर्धारित की गई हैं.

उदाहरण के तौर पर सेलरीड महिलाएं अपनी वेतन के अनुसार अकेले होम लोन ले सकती हैं, जो उन्हें एकल आधार पर मिल सकता है. जबकि एक हाउसवाइफ महिला को एकल आधार पर लोन तभी मिल सकता है यदि उनके नाम कोई प्रोपर्टी पहले से होती है. उनके नाम किसी प्रॉपर्टी के नहीं होने की स्थिति में होम लोन एकल आधार पर नहीं मिलकर ज्वॉइंट में मिल सकता है. ब्याज दर में रियायत भी तभी मिलती है जब ऐसी महिला के ज्वॉइंट लोन में उनका नाम पहले आवेदनकर्ता के रूप में होता है.

आवश्यक दस्तावेज और ब्याज दरें

महिला होम लेने कुछ दस्तावेज कॉमन होते हैं. जबकि कुछ दस्तावेज उनकी स्थिति के संबंध में लिए जाते हैं. कॉमन दस्तावेजों में आइडेंटी प्रूफ, रेसिडेंशियल प्रूफ, तीन पासपोर्ट साइज के फोटो और इनकम प्रूफ हो सकते हैं. इसी के साथ बैंक संबंधी डिटेल लिए जाते हैं.

कायदे से भरे गए होम लोन के आवेदन के पर तीन पासपोर्ट आकार की फोटो लगाई जाती है. आवेदक के पहचान के प्रमाण के लिए मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट, या ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए. इसी तरह रेसिडेंशियल यानी निवास प्रमाण संबंधी दस्तावेजों उपयोगिता बिजली बिल, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या फिर रेटं एग्रीमेंट आदि हो सकता है. इनके साथ—साथ इन दिनों आधार कार्ड नंबर और पैन कार्ड का नंबर भी जरूरी हो गया है. नौकरी के संस्थान का पता और छह माह के सेलरी स्लिप की कापी होना चाहिए. हाउसवाइफ आवेदनकर्ता के भी पहले की तरह सभी दस्तावेजों के अतिरिक्त पिछले छह महीनों का बैंक स्टेटमेंट, पर्सन प्रोपर्टी का विवरण या फिर ज्वाइंट आवेदन कर्ता के दस्तावेज होने चाहिए. अगर पहले से कोई लोन चल रहा है तो उससे संबंधित विवरण भी दिए जाने जरूरी होते हैं.

ब्याज दरें: पुरुषों और महिलाओं के लिए होम लोन की दरों में अंतर होता है. अधिकतर  बैंक महिलाओं को ब्याज दरों में 0.05 प्रतिशत की रियायत देते हैं. यदि किसी बैंक का न्यूनतम ब्याज दर 6.90 प्रतिशत सालाना है, तो यह महिलाओं को 6.85 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर मिलता है. महिलाओं के लिए 2021 में सुरक्षित सुविधाजनक होम लोन के दृष्टिकोण से एसबीआई, पीएनबी, यूनियन बैंक आफ इंडिया, बैंक आफ बड़ौदा, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, कोटक महिंद्रा समेत एलआईसी सबसे अच्छा माना गया है.

वैसे तो इन बैंकों की ब्याज दरें एक जैसी है, लेकिन उनमें छिपे शुल्क में अंतर साथ—साथ वेतनभोगी और स्वरोजगार वाली महिलाओं को ब्याज दर में भी अंतर होता है. उदाहरण के तौर पर एसबीआई होम लोन की ब्याज दर वेतनभोगी महिलाओं के लिए 6.65 प्रतिशत है जबकि  स्वरोजगार वाली महिलाओं के लिए 6.95 प्रतिशत होता है.

इस संदर्भ में एक मई, 2021 से लागू होने की दर सबसे लंबी अवधि के लोन का भी प्रावधान किया गया है. इसके अनुसार 30 साल की लोन के लिए प्रोसेसिंग फीस के साथ लोन राशि के अनुसार जीएसटी भी शामिल कर दिया गया है. यह वैसी परियोजनाओं पर लागू होती है, जिसमें बैंक का बिल्डर के साथ टाई-अप होता है.

होम लोन में छिपे शुल्क: होमलोन लेने से पहले उस में छिपे हुए वैसे शुल्क के बारे में मालूम किया जाना जरूरी होत है. वे प्रोसेसिंग फी, एप्लीकेशन फी, लीगल फी, कनवर्जन फी, एसेसेमेंट फी, फिजिकल ट्रैवल फी, लेट पेमेंट फी, प्रीपेमेंट फी, पार्ट पेमेंट फी, चेक बाउंस फी, एनुअल स्टेटमेंट फी और डाक्युमेंट रिट्राइवल फी के रूप में हो सकता है.

तो देर किस बात की अप्लाई कीजिए होम लोन के लिए और अपने होम में आनंद का क्षण बिताएं अपनी फैमिली के साथ !

( नोट : समय – समय पर सरकार के नियम बदलते रहते हैं, इसलिए इस लेख में कुछ बातों का न मिलना भी हो सकता है )

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