Spread the love

 

-वैभव दुबे

तन श्याम सलोनी ले उठ

निहारा स्फटिक लाल सूर्य

भरा केशों में लालिमा केसर

मंद उपवन अमृत पवन

बन सुधा सलिल चंदन

आ माथ अधर समाया !

निश्चल आलस में मगन उठी

कही मीठी बोली प्रीत बही

पग पायल धरा धर

जग जीव प्राण हर

निशा काजल गए नयन मल

खोले कमल कुंज नयन दल

खोल रचना घर द्वार

बसाया पक्षी पावन पवन निज संसार

दूर गूंजी सुनी ध्वनि बंसी

मन बसी रसिक बंसी

थिरकाया शीतल पृथ्वी तल कमल पाँव

भरी हृदय में मधुरतम् छवि निज गाँव

बसे जाने कौन मेरे हृदय ठाँव

बैठे जाने कौन मन उपवन वृक्ष छाँव!

Leave a Reply

Your email address will not be published.