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– राजकान्ता राज

हे नवल धवल वस्त्र धारणी

हे स्मित अधर माँ हंसवाहिणी

विराजो माँ हृदयपटल पर

बार बार माँ नमन चरण पर

वरदायिनी माँ मुझे वर दे

मन मलिन को विमल कर दे

सुर ताल और बुद्धि प्रखर दे

ध्वनी झंकृति मधुर सुस्वर दे

वरदायिनी माँ मुझे वर दे

हे ज्योतिर्मयी माँ शारदे

अज्ञान तिमिर हर ज्योति जला दे

सप्त स्वर उर में भरपूर दे

लेखनी पर कृपा तू कर दे

वरदायिनी माँ मुझे वर दे.

 

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