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– विद्या शंकर विद्यार्थी

जेकरा के दिल हम दिहलीं दरद मेरा गइल
जिनिगी के हमरी सुधिया निंदिया हेरा गइल
लेके चले के साथ रहे बाकि वादा ना रहल
नैना के नीर कहेला प्रितिया ना ऊ निबहल
सकदम के जिनिगी में सपना घेरा गइल
जेकरा के दिल हम दिहलीं दरद मेरा गइल।
बरगद के आस कइलीं बाकि ना छांह मिलल
दरद के आँसू मिलल बाकि ना राह मिलल
रेत के सफर बा मुश्किल जियरा डेरा गइल
जेकरा के दिल हम दिहलीं दरद मेरा गइल।
चिराग जरा के केहू, ना छोड़ जाला अकेले
सालत बा अब अकेले बानीं हम अब अकेले
दिल देके के बानीं घायल बानीं पेरा गइल
जेकरा के दिल हम दिहलीं दरद मेरा गइल।

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