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  • जयप्रकाश श्रीवास्तव

                         उठापटक
सब ओर मची है,
राम जाने क्या होगा ।

                         रहा ऊँघता
बूढ़ा बरगद
शहर घुसा गाँवों में,
काट रहा है
बिगड़ैलों के
चमरौधा पाँवों में,

उतर रही
जो बची खुची है,
राम जाने क्या होगा।

                         अधिकारों के
लिये लड़ाई
कर्तव्यों पर साधे मौन,
नियम कायदे
कानूनों की
अब परवा करता है कौन,

साजिश मिल
क्या खूब रची है,
राम जाने क्या होगा।

                         अपने घर में
अपराधी से
काट रहे हैं ये जीवन,
देख रहे हैँ
खुशहाली के
सपने सारा सारा दिन,

सच्चाई की
आँख मुची है,
राम जाने क्या होगा

           – आई. सी. 5 सैनिक सोसाइटी
शक्तिनगर जबलपुर 482001 मो. 7869193927

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