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-डॉ.जियाउर रहमान जाफरी

 

हमने जब भी देखा चाँद

कहां था बिल्कुल तुमसा चाँद

 

नहीं कभी वो घर तक आता

लगता लेकिन मामा चाँद

 

कभी अगर तुम छत आये

निकला फिर से पूरा चाँद

 

कैसे आख़िर रह पाता है

आसमान में तन्हा चाँद

 

सूरज चाहे गर्म हो लेकिन

रहता बिल्कुल ठंडा चाँद

 

रौशनी देता है धरती तक

नहीं है तारों जैसा चाँद

 

उसमें दाग़ नहीं तुम देखो

देखो कैसे चमका चाँद

 

काली घटाओं की बांहों में

लगता बिल्कुल उजला चाँद

 

बिजली, आंधी, बारिश, धूप

है इन सबका का दुल्हा चाँद

 

  • स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग

मिर्ज़ा ग़ालिब कॉलेज गया, बिहार

9934847941

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