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 -महेन्द्र ” अटकलपच्चू”

सुनो क्रूस की पहली वाणी

कहा यीशु ने हे! अंतर्यामी।

क्षमा कर इन सबको

क्योंकि ये सब हैं अज्ञानी।।

 

दूजी वाणी में यीशु कहता

तू विश्वास क्यों नहीं करता।

निश्चय आज ही तुझको

मैं जन्नत बख्शता।।

 

तीजा वचन माता से कहता

तुझे आज से इसे सौंप देता।

सुन मेरे प्यारे! बंधु

आज से ये है तेरी माता।।

 

चौथा वचन खुदा से कहता

हे! मेरे जगत विधाता।

कहना माना फिर भी

तूने, क्यों तोड़ा मुझसे नाता।।

 

पंचम वाणी मैं समझाता हूं

मानों बातें जो बतलाता हूं।

प्रेम बाप का हो हम सबमें

इसी बात का, मैं प्यासा हूं।।

 

खुदा ने जबसे जग रचा हुआ

इकलौता जग को दिया हुआ।

करके पूरी सब बातों को

यीशु ने कहा–पूरा हुआ।।

 

हे! पिता अंतिम वचन मैं कहता हूं

कर सेवा पूरी, अब मैं आता हूं।

ले लूंगा फिर वापिस तुझसे, अभी

अपनी आत्मा तुझे सौपता हूं।।

 

 

मो. +918858899720

 

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