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– उदीपा रानी

 

खामोश धड़कन कुछ कह न सका

गमों को हंसकर सह न सका ||

क्या करें बेचारा दिल ही तो है

चुपचाप अकेले रह न सका ||

खता नहीं मुझे तुमसे दूर रहने की

पर हर जख्म अकेले सह न सका ||

हर तरफ अब तन्हा आलम है

खामोश अश्क अब बह न सका ||

दिल टूट गया दर्पण की तरह

सपनों की तरह वह जुट न सका ||

यादें हैं हवा कि मौजों की तरह

दिल चातक की तरह अब रह न सका ||

खामोश धड़कन कुछ कह न सका

गमों को हंसकर सह न सका ||

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