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– विद्या शंकर विद्यार्थी

 

वक्त कहता है- फूंक फूंक कर चल

शालिनता कहती है- झूंक झूंक कर चल

जिंदगी की पहचान गति से होती है, पर

रफ्तार कहती है- रूक रूक कर चल।

पथ में कहीं तिखे मोड़ आते हैं

मोटे अक्षरों में लिखे मोड़ आते हैं

लोग सोच समझकर चलें तो सहीं

कोई जिंदगी छोड़ मोड़ आते हैं।

अंधकार में डूबे तो खो जाओगे

अंहकार में डूबे तो रो जाओगे।

दोनों के बीच एक ही खाई है

प्रेम से जियो यही तो कमाई है।

संसार में जिंदगी बहुमूल्य है

सोचना कुछ नहीं है भूल है

उपहार में मिली यह निधि है

बागवां से पूछो क्या फूल है।

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