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– विद्या शंकर विद्यार्थी

 

माटी के जिनिगी हऽ तिकल करीं ना अइसे

लाठी के जिनिगी हऽ‌ तिकल करीं ना अइसे

 

जहिया चाही सहारा लइका निकाल दिही

साथी ई जिनिगी हऽ तिकल करीं ना अइसे

 

आन के सम्हारे खातिर दुनिया उजार लेलीं

बाती के जिनिगी हऽ तिकल करीं ना अइसे

 

अपना नजर के खार रवा कर तऽ कम‌ दीं

बाकी के जिनिगी हऽ तिकल करीं ना अइसे

 

चुकता करे के रह गइल अबहीं हिसाब बा

थाति के जिनिगी हऽ तिकल करीं ना अइसे।

 

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