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– अलका मित्तल

 

ग़ज़ल

चल रही है सुहानी हवा आज फिर

दिल हुआ है तुम्हीं पे फ़िदा आज फिर।

 

लौट आओ सनम मत रहो तुम ख़फ़ा

आस का दीप दिल में जला आज फिर।

 

छोड़ ख़ुशियाँ हमें कब की तन्हा गईं

साथ ग़म का हमें है मिला आज फिर।

 

शाम ढलने लगी रात अलमस्त है

बावरा दिल मचलने लगा आज फिर।

 

गम जिगर में समाये हुए है बहुत

दर्द अपना ग़ज़ल में कहा आज फिर।

 

हर तरफ़ तीरगी का है आलम यहाँ

चाँद क्यों बादलों मे छुपा आज फिर।

 

साथ मिलकर गुज़ारे हसीं पल कभी

दिल में अलका वो जज़्बा.उठा आज फिर।

 

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