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19 दिसंबर 2021 को शाम 5:00 बजे अखिल भारतीय साहित्य परिषद उत्तराखंड की नैनीताल इकाई  द्वारा वरिष्ठ साहित्यकार अवधेश सिंह द्वारा कोरोना काल पर आधारित  पुस्तक ‘दुनिया जब ठहर गई ‘  के लोकार्पण  सह परिचर्चा का आयोजन  ऑनलाईन माध्यम से किया गया। कार्यक्रम का प्रारम्भ  सर्वप्रथम किरण मौर्य द्वारा सरस्वती वंदना  तत्पश्चात सृष्टि गंगवार द्वारा परिषद गीत की प्रस्तुति के साथ किया गया । कार्यक्रम में बीज वक्तव्य देते हुए पुस्तक ‘ दुनिया जब ठहर गई ‘ के लेखक वरिष्ठ साहित्यकार अवधेश सिंह जी ने  पुस्तक में वर्णित विषय वस्तु का संक्षिप्त वर्णन करते हुए बताया कि इस किताब के माध्यम से यह दिखाया गया है कि कोरोना काल में हमारी जीवन शैली किस प्रकार परिवर्तित हुई। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ जो कि भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण भाग है उसका पालन किस प्रकार हुआ । वास्तव में उस समय दुनिया तो ठहरी लेकिन हमारे देश की सामर्थ्य, शक्ति, एकता व संस्कृति एक तरह से मुखर हो  गई। उन्होंने बताया कि भविष्य में और आपदाएं आ सकती हैं लेकिन अपने व्यवहार के द्वारा हम उनका सामना कैसे करें इस पुस्तक में इसका वर्णन किया गया है। उसके बाद कार्यक्रम में वरिष्ठ वक्ता के रूप में उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकार शंभू प्रसाद भट्ट जी द्वारा मंगलाचरण के साथ अपने वक्तव्य का प्रारंभ किया गया उन्होंने बताया कि पुस्तक में त्रासदी का जिस तरह क्रमवार विवरण दिया गया है यह दस्तावेजीकरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहेगा । उन्होंने कहा कि कोरोना काल में बहुत कुछ खोने के साथ-साथ हमने बहुत कुछ सीखा  और पाया भी है। प्रकृति का सौंदर्यात्मक रूप हमने कोरोनाकाल में  देखा और उस समय शासन व प्रशासन द्वारा जिस प्रकार  आम जनता को  निर्देशित किया गया वह वंदनीय है। विश्व ने हमारे अभिवादन के तरीके को अपनाया जो हमारी संस्कृति की महानता को सिद्ध करता है । तत्पश्चात डॉक्टर स्मृति शर्मा  जो कि कोरोना काल में  केंद्र प्रभारी कोविड-19 गाजियाबाद रही है के  द्वारा पुस्तक के संबंध में अपने विचार प्रस्तुत किए गए । उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी के लिए यह पुस्तक धरोहर का कार्य करेगी। पुस्तक की रचना प्रक्रिया   गागर में सागर भरने की उक्ति चरितार्थ करती है। कोरोनाकाल में देश जिस  तरह से  कठिन परिस्थितियों से उभर  कर आया उसमें भारत का नेतृत्व सराहनीय रहा और फ्रंटलाइन वर्कर्स, एनजीओ, साहित्यकारों सभी के अथक प्रयासों से ही हम इस कठिन दौर से लड़ने में सक्षम रहे। अंत में उन्होंने कुछ पंक्तियों “फूल पथ चलना सरल है शूल पर बढ़ना कठिन ….”के माध्यम से यह बताया कि सोशल डिस्टेंसिंग का मतलब यह नहीं हम वैचारिक रूप से दूर हो जाए इसी के साथ उन्होंने लेखक के प्रति इस रचना हेतु अपनी कृतज्ञता प्रकट की।  डॉ मनोज प्रसाद नौटियाल सह-प्रोफेसर गवर्नमेंट पीजी कॉलेज गोपेश्वर, चमोली  द्वारा पुस्तक के विषय में बताते हुए कहा गया कि पुस्तक की विषयवस्तु, शब्द संयोजन व जीवंत वर्णन सराहनीय है। कोरोना काल में जो सामाजिक प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ा वह इस पुस्तक में वर्णित है। उस समय उपचारात्मक उपाय हमारे पास नहीं थे जिसकी जगह निवारत्मक उपाय अपनाए गए। भारतीय जीवन पद्धति और प्राचीन मूल्यों ने यह साबित कर दिया कि वह विश्व में सर्वश्रेष्ठ है और उन्हें अपना कर मानव सभ्यता को बचाया जा सकता है। अंत में उन्होंने ‘चीनी विषाणु’ शीर्षक से कविता प्रस्तुति के साथ अपने वक्तव्य को समाप्त किया साथ ही साथ कहा कि आने वाले समय में संदर्भ ग्रंथ के रूप में इस पुस्तक की महत्ता बढ़ेगी। इसी क्रम में वरिष्ठ साहित्यकार बृजेंद्र नाथ जी द्वारा पुस्तक के विषय में अपने विचार प्रस्तुत किए गए उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में कोरोना की प्रथम व द्वितीय लहर का वर्णन है यह पुस्तक संग्रहणीय है और यह हम सभी को अवश्य पढ़नी चाहिए। किसी भी आगामी महामारी से निपटने के लिए यह पुस्तक एक अच्छा रोडमैप साबित हो सकती है। अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ सुनील पाठक , अध्यक्ष अखिल भारतीय साहित्य परिषद उत्तराखंड द्वारा  विचार प्रस्तुत करते हुए कहा गया कि वही यथार्थ साहित्य माना जाता है जो समसामयिकता को परिलक्षित करें और यह पुस्तक साहित्य की परिभाषा पर  खरी उतरती है। पुस्तक के अध्यायों में समाज का दर्पण प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक का शीर्षक बिल्कुल सार्थक है क्योंकि दुनिया उस काल में वास्तव में ठहर सी गई थी। लॉकडाउन के समय को याद करते हुए उन्होंने कहा कि  कुछ लोगों को लॉक डाउन का समय  “लगते दिवस समुद्र से लगता समय पहाड़…” जैसा लग रहा था परंतु प्रस्तुत पुस्तक के लेखक ने उस समय का सार्थक उपयोग किया व समाज को एक उत्कृष्ट रचना दी। कार्यक्रम का समापन प्रेरणा द्वारा राष्ट्रीय गीत की प्रस्तुति के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन अरविंद कुमार मौर्य क्षेत्रीय संयोजक अखिल भारतीय साहित्य परिषद नैनीताल द्वारा किया गया। कार्यक्रम में  अस्सिस्टेंट प्रोफेसर सबज सैनी , हिमांशी जी व  उत्तराखंड व अन्य प्रांतों के अनेक साहित्यकार व साहित्यप्रेमी उपस्थित है ।

  • प्रस्तुति : अरविन्द कुमार
2 thoughts on “दुनिया जब ठहर गई – लोकार्पण”
  1. बेहतरीन रिपोर्ट , धन्यवाद आभार – अवधेश सिंह

  2. सफल उदघोषक संचालक के रूप में आप सफल रहें । विस्तृत रिपोर्ट है आभार – अवधेश सिंह

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