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– दीपेश दुबे

कहाँ हो शिव?
पार्श्व पाषाणाकृति में  प्राणप्रतिष्ठित?
या अभिमन्त्रित जल में सिंचिंत?
या कि एक जीर्ण काया की शौष्ठव आभा में?
उसके थरथराहट के ठहराव की गुफा में ?
अभिषेक के पूजा शिल्प में?
 या ध्यान की सुरंग में?
या फिर  नृत्यरत्
एक अथाह शान्ति में?
या पुरानी देह के अप्रितम मुस्कुराहट की
वाद्य ध्वनियों में?
कहाँ हो शिव?

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