Spread the love

 

 

– एल. सी. जैदिया “जैदि”

आदमी को आदमी अब कहाँ नज़र आता है,
लगता है शायद शोहरत का ये असर आता है।
===========================

बदले मिज़ाज आदमी का, मौसम की तरहा,
उजड़ जाऐ जिंदगी जीवन मे वो अगर आता है।
===========================

मरना है सभी को इक दिन आया जो जहां मे,
कौन शख़्स है जीवन मे होकर अमर आता है।
===========================

मिलती है खुशियां अपार जिनको जिंदगी मे,
फितरत आदमी की उसे कहां सबर आता है।
===========================

सच कितना भी दिखाऐं हम चाहे किसी को,
आदमी है कि उसको सब, भ्रम नज़र आता है।
===========================

किस पर ऐतबार करे कोई यहां अब “जैदि”,
यहां हर शख़्स मे, फ्रेब दिखाई मगर आता है।
===========================

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.