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-चिन्मय दीपांकर

 

सुरेश और राजेश नाम के दो भाई थे। सुरेश बहुत लालची था, तो वहीं राजेश बेहद ईमानदार। दोनों गन्ने का रस बेचने का काम करते थे। सुरेश के पास एक गाय भी थी। एक दिन दोनों भाइयों के पास दो आदमी आएं और उनसे कहा कि आज मुखिया जी के बेटे का जन्मदिन है, शाम को दावत है। दावत में गन्ने का रस भी होगा। तुम दोनों को 50-50 लीटर गन्ने का रस शाम को तैयार रखना है। अगर तुम दोनों ने गन्ने का रस तैयार रखा तो तुम दोनों को दस-दस सोने के सिक्के मिलेंगे। यह सुनकर दोनों भाई रस निकालने में जुट गए।

जब सुरेश का रस निकालना पूरा हो गया तब उसने अपनी गाय को राजेश के सारे गन्ने खिला दिए। उधर राजेश ने जब देखा कि उसके पास एक भी गन्ने नहीं हैं तब वह बहुत परेशान हो उठा। देखते-देखते शाम हो आई।

जब शाम को वह दोनों आदमी फिर से दोनों भाई के पास आएं तो राजेश ने उनसे कहा कि मेरे पास गन्ने नहीं थे तो मैं गन्ने का रस निकाल ही नहीं पाया। जबकि सुरेश ने उत्साहित होकर बताया कि मुझे पता था कि राजेश 50 लीटर गन्ने का रस नहीं निकाल पायेगा इसलिए मैंने ही 100 लीटर गन्ने का रस निकाल लिया है।

दावत खत्म होने के बाद दोनों भाइयों को मुखिया जी के सामने पेश किया गया। राजेश की ईमानदारी के चर्चे पूरे गांव में थी, तो मुखिया जी ने सुरेश के सामने राजेश को कहा कि तुम्हें सजा मिलेगी क्योंकि तुमने मेरा दिया हुआ काम नहीं किया और यह झूठ भी बोला कि तुम्हारे पास गन्ने नहीं हैं! जितने सोने के सिक्के दोनों भाइयों को मिलाकर दिए जाते उतने सोने के सिक्के सिर्फ सुरेश को दिए गए।

सुरेश के जाने के बाद मुखिया जी ने राजेश से पूछा कि तुम तो बहुत ईमानदार हो,  तो तुमने मुझसे झूठ क्यों बोला? तब राजेश ने कहा कि मैंने झूठ नहीं बोला है। सच में जब मैंने सुबह देखा था तो मेरे पास गन्ने थे। किंतु जब मैं दोपहर को गन्ने का रस निकालने गया तो देखा कि मेरे पास गन्ने नहीं हैं। राजेश ने कहा कि मुझे अपने भाई पर शक है कि उसने मेरे सारे गन्ने अपनी गाय को खिला दिया। फिर राजेश ने मुखिया जी से कहा कि मेरा आपसे निवेदन है कि क्यों न हम मेरे भाई सुरेश के घर उसे बिना बताए चलें!

मुखिया जी ने राजेश की बात मान ली। जब मुखिया जी और राजेश सुरेश के घर गए तब उन्होंने देखा कि सुरेश कह रहा है कि आज तो उस राजेश को मैंने बहुत अच्छे से बुद्धू बनाया। हाहाहा, कितना बड़ा बुद्धू है वो !

यह सुनते ही मुखिया जी ने सुरेश को दस कोड़े लगाने का आदेश अपने कुछ लोगों को दिया। तब सुरेश को समझ आया कि हमें लालची नहीं होना चाहिए और राजेश को 40 सोने के सिक्के दिए गए। साथ ही उसे गांव के सबसे ईमानदार व्यक्ति होने के रूप में पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

  • कक्षा-3

सेंट जोसफ स्कूल, भागलपुर, बिहार

 

 

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